Friday, July 10, 2026

भृगु नन्दी नाड़ी (BNN) के 100 महत्वपूर्ण ग्रह संयोजन एवं उनके फल

 

ग्रहों के अनुसार 100 BNN Combinations

भृगु नन्दी नाड़ी (BNN - Bhrigu Nandi Nadi) ज्योतिष की एक अत्यंत प्रभावशाली भविष्यवाणी पद्धति है। इसमें ग्रहों के विशेष संयोजन (Combinations) के आधार पर जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण किया जाता है। ये संयोजन स्वास्थ्य, शिक्षा, नौकरी, विवाह, संतान, धन, व्यवसाय, विदेश, आध्यात्मिकता और जीवन की अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं का संकेत देते हैं।

आइए ग्रहवार इन 100 महत्वपूर्ण BNN संयोजनों को समझते हैं।


☀ सूर्य (Sun) BNN Combinations

1. सूर्य + चन्द्र + चतुर्थ/पंचम भाव → रक्तचाप एवं हृदय रोग

2. सूर्य + चन्द्र + शुक्र + द्वितीय भाव → नेत्र रोग

3. सूर्य + चन्द्र + शुक्र + द्वादश भाव → अनिद्रा या नींद की समस्या

4. सूर्य + चन्द्र + शनि → नौकरी / सर्विस

5. सूर्य + चन्द्र + शनि → विवाह में विलम्ब

6. सूर्य + चन्द्र + शनि + षष्ठ भाव → सरकारी नौकरी

7. सूर्य + मंगल + शनि → सरकारी सेवा

8. सूर्य + मंगल + दशम भाव → उच्च पद एवं प्रतिष्ठा

9. सूर्य + मंगल + शनि + षष्ठ भाव → सरकारी नौकरी

10. सूर्य + चन्द्र + केतु + द्वादश भाव → चिकित्सा क्षेत्र

11. सूर्य + गुरु + केतु + द्वादश भाव → डॉक्टर / चिकित्सा क्षेत्र

12. सूर्य + चन्द्र + गुरु + पंचम भाव → आध्यात्मिक व्यवसाय

13. सूर्य + गुरु + लग्न → उत्तम स्वास्थ्य

14. सूर्य + गुरु + शनि → राजनीति

15. सूर्य + बुध + गुरु + नवम भाव → प्राथमिक शिक्षा

16. सूर्य + बुध + गुरु + एकादश भाव → उच्च शिक्षा एवं प्रतिष्ठा

17. सूर्य + बुध + केतु → शिक्षा में बाधा

18. सूर्य + बुध + गुरु → अकाउंट्स एवं गणित

19. सूर्य + शनि + निर्बल लग्नेश → गंजापन


🌙 चन्द्र (Moon) BNN Combinations

20. चन्द्र + गुरु + एकादश भाव → माता के साथ निवास

21. चन्द्र + शनि + द्वितीय/सप्तम भाव → विवाह में विलम्ब

22. चन्द्र + मंगल + राहु → वैवाहिक समस्याएँ

23. चन्द्र + शुक्र + राहु → अवैध संबंध

24. चन्द्र + शुक्र + राहु + द्वितीय भाव → शराब की आदत

25. चन्द्र + शुक्र + केतु (पुरुष कुंडली) → तलाक / वैवाहिक तनाव

26. चन्द्र + मंगल + केतु (स्त्री कुंडली) → तलाक / वैवाहिक तनाव

27. चन्द्र + बुध + नवम भाव → ज्योतिष में रुचि

28. चन्द्र + बुध + दशम भाव → शिक्षा संस्थान

29. चन्द्र + बुध + गुरु → ज्योतिष एवं गूढ़ विद्या

30. चन्द्र + बुध + द्वादश भाव → ज्योतिष में गहरी रुचि

31. चन्द्र + बुध + गुरु + तृतीय भाव → ज्योतिष का गहन अध्ययन

32. चन्द्र + गुरु + केतु → आध्यात्मिक विषयों में रुचि

33. चन्द्र + केतु + लग्न → मानसिक रोग / पागलपन


♂ मंगल (Mars) BNN Combinations

34. मंगल + गुरु + लग्न/षष्ठ भाव → सुखी वैवाहिक जीवन

35. मंगल + शनि + दशम भाव → पुलिस विभाग

36. मंगल + शनि + षष्ठ भाव → एनीमिया

37. मंगल + शनि + नवम भाव → दूसरा विवाह

38. मंगल + शनि + बुध → प्रारम्भिक शिक्षा में बाधा

39. मंगल + बुध + पंचम भाव → प्रेम संबंध

40. मंगल + शनि + बुध → प्रेम प्रसंग

41. मंगल + शुक्र + बुध → अवैध संबंध

42. मंगल + बुध + शनि → तकनीकी शिक्षा

43. मंगल + बुध + शनि + राहु → इंजीनियरिंग

44. मंगल + शुक्र + राहु → कोर्ट केस

45. मंगल + शुक्र + राहु + षष्ठ भाव → कोर्ट केस में असफलता

46. मंगल + शुक्र + गुरु + षष्ठ भाव → कोर्ट केस में सफलता


☿ बुध (Mercury) BNN Combinations

47. बुध + गुरु + द्वितीय भाव → अकाउंट्स

48. बुध + गुरु + दशम भाव → प्रसिद्धि

49. बुध + शनि + नवम भाव → दूसरा विवाह

50. बुध + गुरु + पंचम भाव → शिक्षक / प्रोफेसर

51. बुध + केतु + दशम भाव → ज्योतिष व्यवसाय

52. बुध + गुरु + एकादश भाव → आय में वृद्धि

53. बुध + शुक्र + पंचम भाव → प्रेम संबंध

54. बुध + शुक्र + चतुर्थ भाव → संपत्ति

55. बुध + शुक्र + राहु → संपत्ति विवाद

56. बुध + शनि + षष्ठ भाव → ऋण

57. बुध + मंगल + चतुर्थ भाव → शिक्षा में बाधा

58. बुध + मंगल + शनि → नपुंसकता

59. बुध + शनि + द्वितीय/सप्तम भाव → विवाह में विलम्ब

60. बुध + शनि + शुक्र → शिक्षा संबंधी व्यवसाय


♃ गुरु (Jupiter) BNN Combinations

61. गुरु + शुक्र + सप्तम भाव → शीघ्र विवाह

62. गुरु + चन्द्र + एकादश भाव → समाज सेवा

63. गुरु + सूर्य + लग्न → उत्तम स्वास्थ्य

64. गुरु + शुक्र + राहु → विदेश यात्रा

65. गुरु + शुक्र + द्वादश भाव → विदेश में निवास

66. गुरु + शनि + षष्ठ भाव → बैंक ऋण

67. गुरु + शनि + राहु → भारी कर्ज

68. गुरु + मंगल + पंचम भाव → संतान संबंधी समस्या

69. गुरु + बुध + केतु → ज्योतिष एवं गूढ़ विद्या

70. गुरु + सूर्य + चन्द्र + दशम भाव → आध्यात्मिक व्यवसाय

71. गुरु + शुक्र + एकादश भाव → धन एवं समृद्धि

72. गुरु + शनि + अष्टम भाव → गूढ़ विषयों का अध्ययन

73. गुरु + शुक्र + बुध → उच्च शिक्षित व्यक्ति

74. गुरु + शुक्र + शनि → त्वचा रोग


♀ शुक्र (Venus) BNN Combinations

75. शुक्र + चन्द्र + षष्ठ भाव → महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी रोग

76. शुक्र + शनि + द्वितीय/सप्तम भाव → विवाह में विलम्ब

77. शुक्र + मंगल + पंचम भाव → प्रेम विवाह

78. शुक्र + गुरु + द्वितीय भाव → धन लाभ

79. शुक्र + गुरु + चतुर्थ भाव → मकान एवं संपत्ति

80. शुक्र + गुरु + सप्तम भाव → सुखी वैवाहिक जीवन

81. शुक्र + बुध + दशम भाव → फिल्म एवं मनोरंजन क्षेत्र

82. शुक्र + बुध + चन्द्र → गायन एवं संगीत

83. शुक्र + शनि + षष्ठ भाव → किडनी रोग

84. शुक्र + गुरु + षष्ठ भाव → मधुमेह

85. शुक्र + शनि + राहु → त्वचा रोग

86. शुक्र + मंगल + राहु → अवैध संबंध

87. शुक्र + मंगल + अष्टम भाव → जननांग संबंधी रोग

88. शुक्र + राहु + द्वादश भाव → गुप्त प्रेम संबंध


♄ शनि (Saturn) BNN Combinations

89. शनि + सूर्य + दशम भाव → राजनीति

90. शनि + सूर्य + षष्ठ भाव → सरकारी सेवा

91. शनि + चन्द्र + लग्न → दीर्घकालीन स्वास्थ्य समस्याएँ

92. शनि + मंगल + दशम भाव → कठिन परिश्रम से व्यवसाय

93. शनि + बुध + षष्ठ भाव → ऋण

94. शनि + शुक्र + षष्ठ भाव → किडनी रोग

95. शनि + शुक्र + राहु → त्वचा रोग

96. शनि + गुरु + राहु → भारी कर्ज

97. शनि + मंगल + चतुर्थ भाव → फेफड़ों के रोग / अस्थमा

98. शनि + मंगल + अष्टम भाव → कमर एवं रीढ़ की समस्या

99. शनि + राहु + द्वादश भाव → निर्धनता एवं आर्थिक संघर्ष

100. शनि + केतु + अष्टम भाव → मृत्यु एवं आयु का विश्लेषण


Best Wishes
Astrologer Dr Vijay Goel
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Jaipur

Wednesday, June 03, 2026

क्या 28 वर्ष की आयु के बाद मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है?

 क्या 28 वर्ष की आयु के बाद मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है? क्या कलियुग में मंगल दोष प्रभावहीन हो गया है?

आजकल ज्योतिष जगत में ऐसी बातें अक्सर सुनने को मिलती हैं कि मांगलिक दोष का कोई विशेष महत्व नहीं रह गया है, या फिर 28 वर्ष की आयु के बाद उसका प्रभाव स्वतः समाप्त हो जाता है। इसी कारण बहुत से लोग विवाह मिलान के समय मंगल दोष को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

हाल ही में मेरे अध्ययन में एक ऐसा वास्तविक केस आया जिसने मुझे इस विषय पर पुनः विचार करने के लिए प्रेरित किया।

लड़की की कुंडली में मंगल लग्न से अष्टम भाव में स्थित था तथा चंद्रमा के साथ युति के कारण चंद्र कुंडली से भी मांगलिक योग बन रहा था। अर्थात वह दोनों दृष्टियों से मांगलिक थी।

दूसरी ओर लड़के की कुंडली में मंगल नवम भाव में था तथा चंद्र कुंडली से छठे भाव में स्थित होने के कारण पारंपरिक नियमों के अनुसार मांगलिक दोष नहीं बन रहा था।

दोनों का विवाह लगभग 12 वर्ष पूर्व हुआ था। किंतु इसी वर्ष मई माह 2026 में लड़के का निधन हो गया। मृत्यु का प्रत्यक्ष कारण अत्यधिक शराब सेवन से उत्पन्न गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ थीं। अंततः लीवर फेलियर एवं मल्टीपल ऑर्गन फेलियर के कारण उसका देहांत हो गया।

यहाँ एक और महत्वपूर्ण तथ्य भी ध्यान देने योग्य था। लड़की की कुंडली में शुक्र राहु से ग्रसित था, जबकि लड़के की कुंडली में शुक्र नीच राशि में होकर केतु से प्रभावित था। वैवाहिक सुख और दांपत्य स्थिरता के संदर्भ में यह भी एक गंभीर कारक था। विशेष रूप से लड़की की कुंडली में पति-सुख में कमी अथवा वैधव्य संबंधी संकेतों को यह योग और अधिक बल प्रदान कर रहा था।

मैं यह नहीं कह रहा कि केवल मंगल दोष के कारण ही यह घटना हुई। ज्योतिष में किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए समग्र विश्लेषण आवश्यक होता है। किंतु यह उदाहरण अवश्य बताता है कि मांगलिक दोष को पूरी तरह से निरर्थक मान लेना या बिना गहराई से जांचे नज़रअंदाज़ कर देना उचित नहीं है।

विवाह मिलान के समय केवल मंगल दोष ही नहीं, बल्कि सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र, नवांश, दशा-अंतर्दशा, राहु-केतु के प्रभाव तथा अन्य वैवाहिक योगों का भी गंभीरता से अध्ययन किया जाना चाहिए।

ज्योतिष में लोकप्रिय धारणाओं से अधिक महत्वपूर्ण है — वास्तविक अनुभव, गहन अध्ययन और समग्र विश्लेषण।

🙏 यह पोस्ट केवल ज्योतिषीय अध्ययन एवं चर्चा के उद्देश्य से साझा की जा रही है।
— डॉ. विजय गोयल




Monday, March 02, 2026

Iran Israel War

 🌍 ईरान–इज़राइल स्थिति : दशा और गोचर के आधार पर ज्योतिषीय विश्लेषण (फरवरी–मई 2026)

वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को यदि वैदिक ज्योतिष के दृष्टिकोण से देखें, तो ईरान और इज़राइल दोनों देशों की कुंडली में चल रही दशाएँ और गोचर महत्वपूर्ण संकेत दे रहे हैं।


🇮🇷 ईरान की ज्योतिषीय स्थिति



🔹 दशा विश्लेषण

3 फरवरी 2026 से 22 जून 2026 तक ईरान की कुंडली में बृहस्पति/राहु/शनि की दशा चल रही है।
यह अवधि ईरान के पक्ष में अपेक्षाकृत कमजोर मानी जा रही है।
राहु–शनि का प्रभाव अस्थिरता, आंतरिक दबाव, अंतरराष्ट्रीय आलोचना और अप्रत्याशित संकटों को जन्म दे सकता है।

🔹 गोचर के प्रमुख संकेत

  • 24 फरवरी 2026 को मंगल के कुंभ राशि में प्रवेश करते ही युद्ध जैसे हालात बनने का योग प्रबल हुआ।
  • 2 मार्च से 25 मार्च 2026 के बीच का समय अत्यंत चुनौतीपूर्ण है। इस अवधि में ईरान को सैन्य, आर्थिक या नेतृत्व स्तर पर बड़ा नुकसान संभव है।
  • इस समय उच्च का शुक्र बाधक भाव में सक्रिय होकर देश के शीर्ष नेतृत्व या सत्ता के शिखर पर बैठे व्यक्तियों को प्रभावित कर सकता है।

🔹 11 मार्च 2026 – महत्वपूर्ण मोड़

यदि 11 मार्च को गुरु मार्गी होते हैं, तो इसी कालखंड में कूटनीतिक वार्ता (Diplomatic Talks) या शांति वार्ता की शुरुआत संभव है।

🔹 2 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026

यह अवधि ईरान के लिए अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा सकती है।

  • नई सरकार के गठन के संकेत बन सकते हैं।
  • यदि युद्ध जारी रहता है, तो इस समय ईरान की स्थिति पहले की तुलना में अधिक सशक्त दिखाई दे सकती है।

🇮🇱 इज़राइल की ज्योतिषीय स्थिति


🔹 दशा विश्लेषण

13 जनवरी 2026 से 10 मई 2026 तक इज़राइल की कुंडली में राहु/बृहस्पति/बृहस्पति की दशा चल रही है।
यह संयोजन अचानक और व्यापक परिणाम देने वाली दशा है, जो कभी-कभी अत्यधिक उतार-चढ़ाव और विनाशकारी परिस्थितियाँ भी ला सकती है।

🔹 गोचर के संकेत

  • 2 मार्च से 25 मार्च 2026 तक उच्च का शुक्र इज़राइल को मजबूत अंतरराष्ट्रीय समर्थन दिला सकता है, विशेष रूप से अमेरिका जैसे सहयोगियों से।
    इस अवधि में विजय या सामरिक बढ़त की स्थिति बन सकती है।
  • लेकिन 2 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 का समय इज़राइल के लिए अत्यंत संवेदनशील है।
    इस दौरान असाधारण नुकसान या अप्रत्याशित संकट की संभावना दिखाई देती है।
  • 19 अप्रैल से 11 मई 2026 के बीच शासन व्यवस्था में बड़ा फेरबदल या नेतृत्व परिवर्तन के संकेत भी बन सकते हैं।

🔮 समग्र निष्कर्ष

मार्च 2026 का मध्य काल दोनों देशों के लिए अत्यंत निर्णायक और संवेदनशील प्रतीत होता है।
जहाँ एक ओर प्रारंभिक चरण में इज़राइल को सामरिक बढ़त मिलती दिख रही है, वहीं अप्रैल के प्रारंभ से परिस्थितियाँ तेजी से बदलती नजर आती हैं।

11 मार्च के बाद गुरु के मार्गी होने से शांति वार्ता या कूटनीतिक समाधान की संभावना को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

यह विश्लेषण वैदिक ज्योतिषीय दशा एवं गोचर पर आधारित है। अंतिम निर्णय ईश्वर और समय के हाथ में है।

 

डॉ विजय गोयल

3rd March 2026

#iranisraelconflict #iranisraelwar #IranIsraelTension #iranisrael #GlobalGeopolitics 

Friday, September 05, 2025

 There are many astrologers claiming that this year's combination of a solar and lunar eclipse during Pitru Paksha is happening after 100 or 122 years.

❌ However, this is not correct.

I have personally calculated the last 50 years and found that:

✔️ The same combination occurred during Pitru Paksha in 2006.

✔️ Before that, a solar and lunar eclipse also happened during Pitru Paksha in 1978 and 1977.

🔮 The next time this specific combination will happen during Pitru Paksha is in 2034.

Therefore, this is not a "once in a century" event, but one that has occurred from time to time.

👉 Watch my video on the lunar eclipse here:

https://youtube.com/shorts/uslCs7cniL0 

Astrologer Dr Vijay Goel

WhatsApp : +91 8003004666 

Friday, July 04, 2025

Ruh word from Islamic concept is not equivalent to Atma in Vedic concept

 Here is my research that Ruh in Urdu is NOT Atma in Vedic.

Please read the following :
Qur’anic Definition of Allah: The Foundation of Tawheed
📖 Surah Al-Ikhlas (Chapter 112) — The Essence of Tawheed (Oneness)
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ
اللَّهُ الصَّمَدُ
لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ
وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ
Translation:
Say: He is Allah, the One and Only;
Allah, the Self-Sufficient, Eternal;
He neither begets nor is born;
And there is none comparable to Him.
This Surah defines Allah as:
• One (Ahad) – absolute, indivisible unity
• Self-Sufficient (As-Samad) – not dependent on anything
• Without origin or offspring – uncreated and does not create through lineage
• Incomparable – beyond likeness or form
Surah Al-Baqarah (2:255) – Ayat al-Kursi (Verse of the Throne)
اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ...
Key attributes of Allah described in above verse :
• One and Only Deity
• Ever-Living (Al-Ḥayy)
• Self-Sustaining (Al-Qayyūm)
• All-Knowing and All-Powerful
🧭 Vedic vs Qur’anic View: Brahman and Allah, Ātman, Nafs, and Rūḥ — A Philosophical Distinction:
In ancient Indian tradition, Brahman — the infinite, formless, eternal Absolute — was the foundational principle of existence. Later, Islamic theology introduced the term "Allah" to represent the singular, supreme deity, which in its transcendent and non-material aspects bears similarities with Vedic Brahman.
👉However, the difference becomes significant when we compare the understanding of the individual being — especially nafs, rūḥ, and ātman.
Nafs and Rūḥ ≈ Jīva and Prāṇa (Roughly, Not Exactly)
• Nafs in Qur’anic view corresponds to the jīva (as in Vedic), the individual personality that is subject to judgment.
• Rūḥ corresponds to prāṇa, the vital energy or divine breath that gives life
As per Qur’an 15:29:
“I fashioned him and breathed into him from My rūḥ.”
This can be related to the Indian analogy:
"भगवान ने मिट्टी के पुतले में फूँक मार कर प्राण डाल दिए"
No Equivalent of Vedic Ātman in the Qur’an
The Qur’anic terms "nafs" and "rūḥ" are often misunderstood as being equivalent to the Vedic Ātman, but in essence, they are not the same.
• Ātman in Vedic texts is:
a) Unborn, eternal, indestructible
b) A divine ansh (fragment) of Paramātmā
c) Identical in all beings — pure consciousness beyond name and form
• In contrast:
a) Nafs refers to the individual self, similar to Jiva, with tendencies toward good or evil
b) Rūḥ is the life-giving force, breathed into the human form by Allah — more similar to prāṇa, not ātman.
c) There is no concept of nafs being divine or a portion of Allah
Three Transformations of Nafs (as per Qur’an)
1. Nafs al-Ammārah – the commanding nafs, driven by lower desires
2. Nafs al-Lawwāmah – the self-reproaching nafs, morally aware
3. Nafs al-Mutma’innah – the tranquil nafs, surrendered to Allah’s will
In this worldview, Allah and nafs are distinct — nafs is created by Allah but is not part of Him. It is morally accountable and judged after death.
No Rebirth in Islamic Doctrine
• In Islam, nafs lives one earthly life, after which it awaits resurrection and final judgment
• There is no concept of reincarnation or cyclical rebirth
• Nafs is not eternal — it is created, tested, and rewarded or punished
Core Philosophical Differences:
A) Vedic Philosophy (Sanātana Dharma)
1) Ātman is eternal, divine, and a part of Brahman
2) Jīva undergoes reincarnation due to karma
3) Ultimate goal is mokṣa — merging with Brahman
4) Ātman is identical in all beings
5) Ātman = Brahman (in Advaita)
B) Islamic Philosophy (Qur’anic View)
1) Nafs is created, not divine or eternal
2) Nafs lives one life, then faces judgment
3) Goal is Paradise, by Allah’s mercy
4) Nafs is individual and separate from Allah
5) Allah ≠ nafs, complete distinction
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I Hope all will understand that the major difference and note that Ruh and Atma are not same as it is presumed by many hindus.
Thank you
Vijay Goel.