Wednesday, June 03, 2026

क्या 28 वर्ष की आयु के बाद मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है?

 क्या 28 वर्ष की आयु के बाद मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है? क्या कलियुग में मंगल दोष प्रभावहीन हो गया है?

आजकल ज्योतिष जगत में ऐसी बातें अक्सर सुनने को मिलती हैं कि मांगलिक दोष का कोई विशेष महत्व नहीं रह गया है, या फिर 28 वर्ष की आयु के बाद उसका प्रभाव स्वतः समाप्त हो जाता है। इसी कारण बहुत से लोग विवाह मिलान के समय मंगल दोष को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

हाल ही में मेरे अध्ययन में एक ऐसा वास्तविक केस आया जिसने मुझे इस विषय पर पुनः विचार करने के लिए प्रेरित किया।

लड़की की कुंडली में मंगल लग्न से अष्टम भाव में स्थित था तथा चंद्रमा के साथ युति के कारण चंद्र कुंडली से भी मांगलिक योग बन रहा था। अर्थात वह दोनों दृष्टियों से मांगलिक थी।

दूसरी ओर लड़के की कुंडली में मंगल नवम भाव में था तथा चंद्र कुंडली से छठे भाव में स्थित होने के कारण पारंपरिक नियमों के अनुसार मांगलिक दोष नहीं बन रहा था।

दोनों का विवाह लगभग 12 वर्ष पूर्व हुआ था। किंतु इसी वर्ष मई माह 2026 में लड़के का निधन हो गया। मृत्यु का प्रत्यक्ष कारण अत्यधिक शराब सेवन से उत्पन्न गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ थीं। अंततः लीवर फेलियर एवं मल्टीपल ऑर्गन फेलियर के कारण उसका देहांत हो गया।

यहाँ एक और महत्वपूर्ण तथ्य भी ध्यान देने योग्य था। लड़की की कुंडली में शुक्र राहु से ग्रसित था, जबकि लड़के की कुंडली में शुक्र नीच राशि में होकर केतु से प्रभावित था। वैवाहिक सुख और दांपत्य स्थिरता के संदर्भ में यह भी एक गंभीर कारक था। विशेष रूप से लड़की की कुंडली में पति-सुख में कमी अथवा वैधव्य संबंधी संकेतों को यह योग और अधिक बल प्रदान कर रहा था।

मैं यह नहीं कह रहा कि केवल मंगल दोष के कारण ही यह घटना हुई। ज्योतिष में किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए समग्र विश्लेषण आवश्यक होता है। किंतु यह उदाहरण अवश्य बताता है कि मांगलिक दोष को पूरी तरह से निरर्थक मान लेना या बिना गहराई से जांचे नज़रअंदाज़ कर देना उचित नहीं है।

विवाह मिलान के समय केवल मंगल दोष ही नहीं, बल्कि सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र, नवांश, दशा-अंतर्दशा, राहु-केतु के प्रभाव तथा अन्य वैवाहिक योगों का भी गंभीरता से अध्ययन किया जाना चाहिए।

ज्योतिष में लोकप्रिय धारणाओं से अधिक महत्वपूर्ण है — वास्तविक अनुभव, गहन अध्ययन और समग्र विश्लेषण।

🙏 यह पोस्ट केवल ज्योतिषीय अध्ययन एवं चर्चा के उद्देश्य से साझा की जा रही है।
— डॉ. विजय गोयल




Monday, March 02, 2026

Iran Israel War

 🌍 ईरान–इज़राइल स्थिति : दशा और गोचर के आधार पर ज्योतिषीय विश्लेषण (फरवरी–मई 2026)

वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को यदि वैदिक ज्योतिष के दृष्टिकोण से देखें, तो ईरान और इज़राइल दोनों देशों की कुंडली में चल रही दशाएँ और गोचर महत्वपूर्ण संकेत दे रहे हैं।


🇮🇷 ईरान की ज्योतिषीय स्थिति



🔹 दशा विश्लेषण

3 फरवरी 2026 से 22 जून 2026 तक ईरान की कुंडली में बृहस्पति/राहु/शनि की दशा चल रही है।
यह अवधि ईरान के पक्ष में अपेक्षाकृत कमजोर मानी जा रही है।
राहु–शनि का प्रभाव अस्थिरता, आंतरिक दबाव, अंतरराष्ट्रीय आलोचना और अप्रत्याशित संकटों को जन्म दे सकता है।

🔹 गोचर के प्रमुख संकेत

  • 24 फरवरी 2026 को मंगल के कुंभ राशि में प्रवेश करते ही युद्ध जैसे हालात बनने का योग प्रबल हुआ।
  • 2 मार्च से 25 मार्च 2026 के बीच का समय अत्यंत चुनौतीपूर्ण है। इस अवधि में ईरान को सैन्य, आर्थिक या नेतृत्व स्तर पर बड़ा नुकसान संभव है।
  • इस समय उच्च का शुक्र बाधक भाव में सक्रिय होकर देश के शीर्ष नेतृत्व या सत्ता के शिखर पर बैठे व्यक्तियों को प्रभावित कर सकता है।

🔹 11 मार्च 2026 – महत्वपूर्ण मोड़

यदि 11 मार्च को गुरु मार्गी होते हैं, तो इसी कालखंड में कूटनीतिक वार्ता (Diplomatic Talks) या शांति वार्ता की शुरुआत संभव है।

🔹 2 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026

यह अवधि ईरान के लिए अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा सकती है।

  • नई सरकार के गठन के संकेत बन सकते हैं।
  • यदि युद्ध जारी रहता है, तो इस समय ईरान की स्थिति पहले की तुलना में अधिक सशक्त दिखाई दे सकती है।

🇮🇱 इज़राइल की ज्योतिषीय स्थिति


🔹 दशा विश्लेषण

13 जनवरी 2026 से 10 मई 2026 तक इज़राइल की कुंडली में राहु/बृहस्पति/बृहस्पति की दशा चल रही है।
यह संयोजन अचानक और व्यापक परिणाम देने वाली दशा है, जो कभी-कभी अत्यधिक उतार-चढ़ाव और विनाशकारी परिस्थितियाँ भी ला सकती है।

🔹 गोचर के संकेत

  • 2 मार्च से 25 मार्च 2026 तक उच्च का शुक्र इज़राइल को मजबूत अंतरराष्ट्रीय समर्थन दिला सकता है, विशेष रूप से अमेरिका जैसे सहयोगियों से।
    इस अवधि में विजय या सामरिक बढ़त की स्थिति बन सकती है।
  • लेकिन 2 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 का समय इज़राइल के लिए अत्यंत संवेदनशील है।
    इस दौरान असाधारण नुकसान या अप्रत्याशित संकट की संभावना दिखाई देती है।
  • 19 अप्रैल से 11 मई 2026 के बीच शासन व्यवस्था में बड़ा फेरबदल या नेतृत्व परिवर्तन के संकेत भी बन सकते हैं।

🔮 समग्र निष्कर्ष

मार्च 2026 का मध्य काल दोनों देशों के लिए अत्यंत निर्णायक और संवेदनशील प्रतीत होता है।
जहाँ एक ओर प्रारंभिक चरण में इज़राइल को सामरिक बढ़त मिलती दिख रही है, वहीं अप्रैल के प्रारंभ से परिस्थितियाँ तेजी से बदलती नजर आती हैं।

11 मार्च के बाद गुरु के मार्गी होने से शांति वार्ता या कूटनीतिक समाधान की संभावना को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

यह विश्लेषण वैदिक ज्योतिषीय दशा एवं गोचर पर आधारित है। अंतिम निर्णय ईश्वर और समय के हाथ में है।

 

डॉ विजय गोयल

3rd March 2026

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